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मुहब्बतों का सफर

Niraj Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुद्दत हुई उसे देखा नही
        
                                                    
                            
ख्वाबों में भी आता नही

जाते जाते पलट कर देखा
कहा कुछ भी ऐसा नहीं

मुहब्बतों के सफर में होता है
संभलने का भी मौका नहीं ।
2 वर्ष पहले
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