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अलविदा पच्चीस

Nikhalesh Shah

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            माँ गंगा को नमन कर
        
                                                    
                            
महाकुंभ ने किया आरंभ
प्रयाग में हुआ सबका संगम
किसीने पाया धन तो
किसीने पाया प्रभु का आशीष

दिल्ली में हुआ हंगामा
रेलवे में मची भगदड़
ट्राफिक ने ली जान
ओवरब्रिज हुआ ओवर
प्रयाग का संगम बना यादगार
कर भला तो अंत भला

आई खुशियों की बौछाड़
अपनो के साथ उड़ाई गुलाल
रंगों से स्वागत किया होली का
सप्तरंगों ने जीवन की नईं उमंग भरी
उमंग उल्लास से हमारी होली खिली

खुशी की हंसी खून में तब्दील हुई
पहलगाम ने मासूमों की जान ली
हिंदू थे इस लिए जान से गए
कुत्तों ने धर्म पूछ के गोली मारी
कायरों ने निहत्थों पर वार किया

सुहागन को विधवा बनाया
वीरों ने ऑपरेशन सिंदूर अपनाया
एक एक को चुन चुन के मारा
भारत - पाक का युद्ध छिड़ गया
राजस्थान ने गोला बारूद जेला
अंत में पाक ने घुटने टेके
भारत माँ की विजय लहराई

पच्चीस ने बहुत कुछ दिया
पच्चीस ने बहुत कुछ लिया
हादसे पर हादसे हुए
कभी पल भर की खुशी
कभी दुखोका पहाड़

कही ट्रेन ने ली जान
तो गुजरात में हुआ प्लेन क्रेश
कही यात्रिकों ने गंवाई जान
ना मिला कोई वजूद
(DNA)टेस्ट कर पहचान पाई
हर जगह मातम छा गया

पच्चीस ने भयानक रूप लिया
अपनो से अपने दूर हुए
कोई घर खाली तो,
को घर अधूरा हो गया
पच्चीस देख तूने क्या किया

सरकार ने कुछ गलत फैसले लिए
कभी जंगल को नोचा तो
कभी पशुओं पक्षियों का घर छीना
आखरी वक्तमे भी कुछ बाकी था
जो तूने अरावली को भी नहीं बक्शा

जाते जाते आंसू क्यों टपका रही है
ये तेरे मोती जैसे आंसुओं से भी
हमको तकलीफ हो रही है
क्योंकि सर्दी में बारिश नहीं
सर्दी में ठंडी हवा चाहिए
सर्दी में शीतलता चाहिए

पच्चीस तुझे
अलविदा कहूं या याद रखूं
तुझसे नफरत करूं या प्यार दूं
तुझे अपना कहूं या पराया
एक वादा करके जा
हमारा दुःख दर्द ले जा , सुख चैन दे जा
छब्बीस को नई उमंग नई रोशनी के साथ भेज

 
7 महीने पहले
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