स्त्री एक कविता है
जो रची गई है
कोमलता के कागज़ पर
भावनाओं की स्याही भर
जज़्बातों की कलम से
जिसकी दर्द पीड़ा वेदना के नुक्तों को
ढाँप दिया ममता प्रेम और त्याग के श्रृंगारों से
स्त्री एक कविता है
जिसमें जगह नही है प्रश्नों की
जिसमें लय है बस कर्तव्यों की
स्त्री एक कविता है
और सुन्दरता तो कविता की पहली शर्त है
स्त्री एक कविता है
जिसके जैसे भाव उसने वैसी बाँची है