खामोशी के बीच में
बस एक आवाज़
टिप-टिप-टिप-टिप
बारिश की बूँद की
छनछनाहट से
सारा माहौल गूँज उठा ।
मस्त सर्द हवाएँ
खिलखिलाते फूल, मनमोहन मिट्टी
पेड़ों की पत्तियां और
चारों ओर हरियाली ।
इस बीच
एक नन्ही गिलहरी
अकेली, तन्हा
आँखों में एक उम्मीद-सी
दुनिया की ठोकर खाकर
अब जिंदगी जीना सीख लिया
पकड़ लिया प्रकृति का हाथ
झूमने लगी उसके साथ ।