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माँ-माँ होती हैं बाप-बाप होता है।

Nema Ram

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            माँ-माँ होती हैं बाप-बाप होता है।
        
                                                    
                            
सम्मान दोनों का बराबर होता है।
पर थोड़ा व्यवहार में अंतर होता हैं।
तो थोड़ा प्यार में भी अंतर होता हैं।

बाप की आवाज भारी होती है।
माँ की आवाज मृदुल होती हैं।

बाप के हाथ थोड़े कठोर होते हैं।
पर माँ के हाथ तो कोमल होते हैं।

बाप के जूते मजबूत होते हैं।
पर माँ के जूते मुलायम होते हैं।

बाप की आँखें कभी गुस्से में लाल होती है।
पर माँ की आँखें काजल से प्यारी होती है।

बाप को गुस्सा थोड़ा जल्दी आता है।
पर माँ को गुस्सा थोड़ा कम आता है।

बाप के हाथ की मार भारी पड़ती है।
माँ के हाथ की मार प्यारी पड़ती है।

बाप जब मारता है तो हम रोते हैं।
माँ जब मारती है तो हम हँसते हैं।

बाप के हाथ में जो आए उसी से मार पड़ती है।
पर माँ हाथ में बेलन,झाड़ू को ले दौड़ पड़ती हैं।

भारी बेलन को वो पीछे फेंकती नहीं है।
और हल्के झाड़ू की मार पड़ती नहीं है।

बाप के हाथ की मार के निशान पड़ जाते हैं।
माँ की मार के निशान हँसते ही मिट जाते है।

बाप के कपड़ों की जोड़ी दो चार होती है।
माँ के कपड़ों की अलमारी भरी होती है।

बाप को रात और दिन कमाना पड़ता है।
माँ को घर का काम संभालना पड़ता है।

बाप के हाथ की रोटी अधजली मोटी होती है।
माँ के हाथ की रोटी पतली और छोटी होती हैं।

बाप के जूतों की जोड़ी एक या दो होती है।
माँ के जूतों की जोड़ी हर बार नई होती है।

बाप के पैसे बटुए या जेब में पड़े रहते हैं।
माँ के पैसे माँ की नजरों में ही पड़े रहते है।

माँ-माँ होती हैं बाप-बाप होता है।
सम्मान दोनों का बराबर होता है।
पर थोड़ा व्यवहार में अंतर होता हैं।
तो थोड़ा प्यार में भी अंतर होता हैं।



नेमाराम बरना
10 महीने पहले
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