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दया विचार

Namit Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मन में प्रेम भाव जो लाती,
        
                                                    
                            
हिय से क्रोध को दूर भगाती।

करती द्रवित जो जीव के मन को,
दया दूज के दुख समझाती।

उर में विचार एक नीच आए,
अन्य के प्राण मूर्ख लेना चाहे।

हृदय में दया जीव के आए,
विचार बदल प्रेम समाये।

हिंसा नहीं रह पाती है,
जब हिय में दया भर आती है।

दया हृदय को कोमल करती,
दया से मानवता बढ़ती।
एक वर्ष पहले
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