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गुलाबी गालों से लरजता पानी

nagendra Kavidayal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            
ये गुलाबी गुलाब बेहद खूबसूरत है
लेकिन न जाने क्यों मुझे
फूल से ज्यादा उसमें
उसका अक्स नज़र आता है
कुछ उनिदा सा लगता है
ठीक से जागा नहीं है
उसका हारा दुपट्टा कुछ
बेतरतीब बिखरा हुआ सा
सुन्दर मुखड़े को छिपाने क़ी
कोशिश मै असफल सा
लगता है हार मान गया है
उसे शायद नहीं मालूम
हर खूबसूरत चीज
निहारने के लिए होती है
जो नयनों को तृप्ति और
मन को संतुष्टि देती है
गुलाब से गिरती जल बुँदे
हाय दिल बेकाबू हो गया
लगता है अभी स्नान करके
निकली हो जैसे जल कुंड से
पानी क़ी बुँदे गिरना तो नहीं चाहती
उसके दमकते मुखड़े से
लगता है जैसे बूंदों क़ी प्यास
बुझी नहीं है गुलाबी गालों से
ये प्यास कभी कम नहीं हो सकती
चाहे जितनी देर चिपकी रहे
गोरे गालों और सुर्ख होठो से
2 महीने पहले
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