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फ़रेब की दुनिया

Mukesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सच हो तुम फ़रेब की दुनिया में
        
                                                    
                            
ग़लत नज़रिया मत समझना।।
मेरा प्रेम तुम्हारी ज़िन्दगी होगी
ज़िन्दगी को कभी बेकार मत समझना।।
चाहकर भी हम तुमसे दूर हो नहीं सकते।
यही प्यार है प्यार को मजबूर मत समझना।।
पढ़ते रहे लोग मुझे अपने अपने नज़रिया से।
इस नज़रिया को मेरा किरदार मत समझना।।
कुछ बातें दिल में रहकर भी कही नहीं जातीं,
मेरी ख़ामोशी को मेरा इज़हार मत समझना।।
तुम्हें चाहना कोई खता नहीं है मेरी,
इस चाहत को मेरा कोई स्वार्थ मत समझना।।
वक़्त बदलेगा, हालात भी बदलेंगे शायद,
मेरी मोहब्बत को वक़्त का व्यवहार मत समझना।।
मैं रहूँ या न रहूँ तुम्हारी ज़िंदगी में,
मेरे प्रेम को कभी अपना अधिकार मत समझना।।
एक घंटा पहले
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