क्या लिखूं मां के लिए, जिसने मुझे लिख डाला है
प्यार ही मौसम था वो, जिसमें उसने पाला है
उसके इतने कर्ज मुझपर, क्या क्या उतारूंगा मैं
मर कर भी उसका सदका, कैसे उतारूंगा मैं
माँ से बड़ा दुनिया में ना कोई, मेरा रब ही जाने है
उसके नाम से सारी दुनिया, वाले मुझको माने हैं
बचपन मे ऊंगली पकडकर, चलना भी सिखाया है
उसकी मेहनत से ही मैंने, दुनिया में कुछ पाया है
तू मेरे ज़िगर का टुकडा है , माँ ने मुझे बतलाया है
माँ का आँचल बच्चों के, लिए तो एक शरमाया है
माँ ही हैं जो जान है जाती, बच्चों की हर हरकत को
माँ प्यार की मूरत है बस , बात यही लिख डाला है
तस्वीर
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