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माँ मेरी तुम महान हो

MOHD TASVIRUL ISLAM

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जा तेरा गुण गान हो,अपनी एक पहचान हो
        
                                                    
                            
धरती अम्बर सब तुझे चाहें , उच्च तेरा स्थान हो
कदम कदम पर जिसने सिखाया , भूल नहीं जाना उनको
नाम करो उनका इतना तुम, तुम मेरा अभिमान हो

प्रगति के पथ पर आगे चलकर, करना है उत्थान तुम्हे
देश का नाम करोगे रोशन , इतना है अभिमान मुझे
माँ बाप से बढ़कर कोई ना दूजा , सारी दुनिय़ा जाने है
दिल से उनका नमन करो, रखना है सम्मान तुम्हे

ईश्वर ही हैं मात पिता , ये वाणी कंठस्थ करो
धरती पर वरदान हैं वो, ईश्वर से तुम नमन करो
गुरु से बढ़कर दुनिया मे , होता ही नहीं कोई हितकर
मान बढाअो इनका उतना, याद रखें तुम्हे जीवन भर

खूब करो तुम मेहनत अपनी , ग्यान करो तुम खूब प्रखर
बस यही माँ की इच्छा है, नाम मेरा हो तुमसे गर
याद रखो बचपन अपना तुम , भूल नहीं जाना इसको
उमंग भरा हो जीवन सबका , खुशियाँ भी हो खूब भरपूर

ध्यान रहे तस्वीर की बातें , उसकी एक एक वादे नाते
जिसने पल पल सिखाया मुझे सिखाया , रिश्ते नाते- रिश्ते नाते
तेरी मेहनत का हर ज़जबा , आज पता चल गया है मुझको
आओ मिल के हम सब बोले, माँ मेरी तुम महान हो


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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