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मां मेरी अनमोल है

MOHD TASVIRUL ISLAM

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मीठे मीठे बोल हैं
        
                                                    
                            
मां मेरी अनमोल है
जब भी मैं उनसे रहूं दूर
कहती दुनिया गोल है
जब भी मन मेरा हो खराब
मुझे कहती गोल मटोल है
मेरी ही सृजनी है वो
बिन उसके जीवन डांवाडोल है
जब भी मेरा पेट खराब
कहती ईसबगोल है
मां मेरी अनमोल है
मीठे मीठे बोल है
एक तेरी ममता ही बस
दुनिया में बे मोल है
धरती पर है वह अभागा
जिसे मां का आंचल नहीं मिला
इसीलिए धरती का अपना
एक विचित्र भूगोल है
जब भी मां तेरी तस्वीर देखता
मन ही मन में कहता हूं
एक तू ही है सत्य धरा पर
बाकी गड़बड़ झोल है
मां मेरी अनमोल है
मीठे उसके बोल हैं

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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