हृदय विदारक घटना
देख मन उद्धवेलित
करता है अट्ठाहस
अम्फान धरती पर
बंगाल रो रहा है
उत्कल है भयभीत
प्रकृति के शक्ति के आगे
चलती ना कोई नीति
विरह वेदना मे
अश्रु ही कुलगीत
मन भावन उत्कल बंगाल का
रुदन बना संगीत
प्रकृति है अप्रतिम
एक सुनहरी रीति
साथ चलने से मिट जाता है
सबका बुरा अतीत
ईश्वर है उद्धारक
मानुष का पालनहारक
कभी कभी वह रौद्र रुप मे
हो जाता हैं प्रतीत
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