देश की मिट्टी को हमने जख़्म उठाते देखा है
रह रह के अपने आँखो मे आँसू लाते देखा है
कभी बीमारी कभी कोरोना बहुत लडाई देखा है
मन के रोगी, बर बैरागी और धूर्तों को देखा है
देश बेचने वाले नेता , धन लोभी भी देखा है
धर्म धर्म पे लड़ने वाले, छुटभैयो को देखा है
देश के वीर जवानों को सीमा पे मरते देखा है
समाचार वाचक को सबने खूब चिल्लाते देखा है
देश से कैसे मिटे गरीबी , तनिक किसी को ध्यान नहीं
पैसा खूब रहे जेब में, यह ध्यान लगाते देखा है
कब मानेगी देश की जनता, जीवन मरण यही पर है
खुशहाली हो देश में अपने ये सपना देखा है
मोहम्मद तस्वीरूल इस्लाम ( तस्वीर )
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