बड़ी सत्तियारी है, कैसन ई खुमारी है
आवत जात कुच्छो नाही , बस बरुवारी है
थोड़ा कुछ समझो सबका , करो नाही कोई टोटका
लडिके का कई लेबो , मर जयबो एक दिन का
काहे करत हो, ई बेईमानी ई शैतानी
कुछ ना मिली तोहके बस , खत्म ज़िन्दगानी
मुस्लिम हिंदू सिख इसाई , करके तू का पईबो हो
मन मे मैल भर के तू , केतना बरस जी पईबो हो
बन जाओ अब तुम मनई, ज़िये देव तुम सबका संघरी
ना कोई परपंच करो , रहो साथ तुम सबके संघरी
बनेक है महान तो , कुछ अच्छा करेक पड़ी
जीयेक है जो लम्बा तो , मोहब्बत करेक पड़ी
मोहम्मद तस्वीरूल इस्लाम
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