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फ़रियाद ना करना हमको

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अजीब राब्ता है इस
        
                                                    
                            
शमा बुझी महफ़िल से
मुक़द्दर भी हमको
ख़ामोश जुदा बना देता है

फिर ये कहें कि जिस दस्तूर
जहाँ पे जीते हैं
वही हमको महफूज़
जुदा बना देता है हमसे

दिल-लगी ना लगाना हमसे
उन ख़यालों की महफ़िल में
हमें भी लौट जाना है

फ़रियाद ना करना हमको
यूँ कहो कि इस
शमा बुझी महफ़िल से
हमें मोहब्बत हो जाना है
 
एक घंटा पहले
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