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माँ से सुंदर अब तक मैंने...

Meena Gopal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुझपर तेरे दुआओं का
        
                                                    
                            
सेहरा बंधा था।
किसी बद्दुआओं से
मुझको डर कहाँ था?
बेशक...बेशक तू आज
मेरी दुनिया में नही है...
मगर , मेरे हर सांस में
तू अब भी हुआ करती है।
मैं उदास होऊं,
या दिल से मुस्कुराऊँ
माँ...तू सदा मेरे
आस -पास हुआ करती है।
तुझसे सुंदर अब तक मैने
कोई रचना नही देखा
बहुत देखा कृति ईश्वर की
मगर...माँ जैसा दूजा नही देखा।
कहाँ बांध पाती हूँ , मैं
तुझको शब्दों की सीमा-रेखा में
अनन्त, अथाह,अपरिमित... मां
तुझको मेरा शत-शत नमन है ।

मीना गोपाल त्रिपाठी
कोतमा, अनुपपुर(मध्यप्रदेश)
3 वर्ष पहले
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