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सौगातें

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये धूप
        
                                                    
                            
ये बारिश
ये हवा
ये पानी
मेघ
तारे-सितारे
भास्कर और चांदनी रातें
सब मिले प्रकृति से
सौगातें बेमिसाल !!

परंतु जमाने से क्या मिला मुझे?
ले दे के मेरे
मरासिम थे ,अपने-अपने
उसी में मिले, मुझे
दर्द न जाने कितने?
एक एक कर बताता हूं
ये रिश्ते
ये नाते
ये दिखावे
नफ़रत के सबब
वफ़ादारी की परख
क्या कुछ नहीं मिला मुझे?
हां! देनेवाले लोग!
पराए नहीं
सभी अपने थे
ये ज़िंदगी के सच और
वाक़िफ सारे गम।।
3 वर्ष पहले
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