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मुक्ति की प्रतीक्षा

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मिट जाना भी
        
                                                    
                            
तुम्हारी प्रतीक्षा में
अमरत्व पा जाने जैसा होगा
यदि पहचान तुम्हारी
अक्षुण्ण रह जाय, तो
विरह की ज्वाला में मुझे
होम हो जाना भी
स्वीकार होगा।।

यदि दे दो मुझे आज्ञा
तो बन जाऊंगा
मोम की प्रतिमा
सहर्ष!
फिर रख देना मुझे
तुषाद के संग्रहालय में
वहां पूर्व से रखे
तमाम प्रतिमाओं से भिन्न रहूंगा
क्योंकि मुझे तुम्हारे आने की
प्रतीक्षा रहेगी
तुम्हारे आए बिना
मुझे मुक्ति नहीं होगी।।
3 वर्ष पहले
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