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मेरी सरलता

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लिखना पढ़ना
        
                                                    
                            
चाहे जितना विशिष्ट
रहना जीवन में
सरल -शिष्ट
ठंड़ी पवन जब
बहती मधुर- मधुर
लगती है, कितनी सुंदर- शिष्ट
जब वायु होती प्रचंड
लगती कितनी
निर्मम- निष्ठुर।।

सरल होता सदाअमृत सा
विष होता सदा गरल ही
मूल- मौलिकता त्यजना
प्रकृति से विमुख होना होगा
रहना सदा सरल सा,
पंक में भी रह कर
खिल जाना तुम
सुंदर मनमोहक
पंकज- जलज सा।।

छोड़ देना कृतिम वसन
ओढ़ लेना प्राकृतिक आवरण
प्रकृति है, सुख की जननी
विशिष्ट हो कर भी, क्या है करनी
जग तो है, सुंदर सुहावनी
पाना है शिखर, पर रहना है, सदा
सीधा- साधा- कोमल- निश्छल
सीधा- साधा- कोमल- निश्छल।।
-मनोज सिन्हा
2 वर्ष पहले
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