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गीतार्थ

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मौन में मन बसा
        
                                                    
                            
वचन से मिली पहचान
दोनों में जब-जब सामंजस्य हुआ
आदमी बना इंसान।।।

प्रभु हरि! को प्रिय है
संवादों के अनुनाद
दूर करता है यह संवाद
मन में व्याप्त अंधकारों को।।

ज्वलंत प्रमाण बना
गीतार्थ कुरुक्षेत्र में
तब सत्य ने पाया
विजय असत्य पर
तब जाकर पांडवों ने पाया
कौरवों से युद्ध कर निदान।।

गीता से उद्भुत होता है
सुध-बुध हर मन में
गीता के पथ पर चलकर
पाता है, मानव सुमार्ग
जीवन के कठिन डगर में।।
3 वर्ष पहले
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