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एकाकार

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या पूजन
        
                                                    
                            
अर्चन क्या
लीन हूं तुझमें
बेलों सी लिपट कर
एकाकार हुआ है
मेरा अन्तर्मन
तुझमें अर्पित कर समस्त
हे! हरि रखना मुझे
समीप अपने चरणों में
जन्म-जन्मांतर तक!!
हे हरि! हे हरि!!
2 वर्ष पहले
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Shivam Awasthi

3 कविताएं

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