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भाव जो बह गए

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बूंदें जो नैनों से बहे, वे
        
                                                    
                            
मुझे झिलमिल तारों से लगे
स्वप्निल मुस्कानों में रहे वे ढले
छिपा गए अपनी सारी व्यथाएं और उदासियां
मेघ से मन के तले
उफ भी नहीं किया, न निकली आह भी
लेकिन भाव जब कभी भी उमड़े उर में
नैनों से बूंदें बन बह गए अविरल
बूंदें जो बहें---------------------
मुझे तो वे झिलमिल तारों से लगे
मुझे तो वे झिलमिल तारों से लगे।।
-मनोज सिन्हा
2 वर्ष पहले
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