बहुत ही अच्छे से दीदार
किए हैं मैंने,आज के
संध्या में चांद के नीचे तारे।।
शुरू हुए अब यह पाक
रमजान का त्योहार,
लगते हैं कितने प्यारे।।
पहले रोज़े के शाम देखने
को , नहीं मिले चाँद के
नीचे तारे का नज़ारा ।।
कुदरत की लीला है जो
आज खुले आसमान में
अपने आँखों से निहारा।।
देखते ही भौचक्के रहकर
मैंने इस पवित्र चंद्रमा को
निहारता रहा जो लगे प्यारा।।
- एम के सिंह
भागलपुर (बिहार)