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कुदरत की लीला

Manoj Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहुत ही अच्छे से दीदार
        
                                                    
                            
किए हैं मैंने,आज के
संध्या में चांद के नीचे तारे।।

शुरू हुए अब यह पाक
रमजान का त्योहार,
लगते हैं कितने प्यारे।।

पहले रोज़े के शाम देखने
को , नहीं मिले चाँद के
नीचे तारे का नज़ारा ।।

कुदरत की लीला है जो
आज खुले आसमान में
अपने आँखों से निहारा।।

देखते ही भौचक्के रहकर
मैंने इस पवित्र चंद्रमा को
निहारता रहा जो लगे प्यारा।।

- एम के सिंह
भागलपुर (बिहार)
3 वर्ष पहले
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