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विशाल समुद्र

Manju Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कितने दरिया समाहित हैं मुझ में
        
                                                    
                            
मैं विशाल ह्रदय वाला समुद्र हूँ
कितने बवंडर आमदा हैं मुझ में
ऊपर से फिर भी रहता भद्र हूँ।
-मं शर्मा रज़ा
2 घंटे पहले
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