क्रोध था छलक गया
मायूसी घर तक आई
अहंकार ले डूबा
दंभ ने लंका जलाई
शब्द जब खामोश हुए
अंतस में थी पीर समाई
नयनों की नमी से
आँसुओं की फसल उग आई।
-मं शर्मा