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कोई भलामानुष था

Manju Anand

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अजब वो नज़ारा था,
        
                                                    
                            
तुफानी बारिश में कोई नहा रहा था,
तेज़ हवाओं का शोर भी था,
सर तक ओढ़े सफेद चादर वो भीग रहा था,
कर रहा था विश्राम अंतहीन विश्राम,
मोहमाया से हर बँधन से मुक्त हो चुका था,
कौन पास है कौन दूर सबसे बेपरवाह,
चिरनिद्रा में लीन था,
इंद्र देवता उसे स्वयं लेने आए थे,
कर रहे थे उसका स्वागत सत्कार,
खुशी अपनी ज़ाहिर नहीं कर पा रहा था,
निश्चय ही वह खुश था,
ना कोई चिंता ना कोई फिक्र,
आज ईश्वर के घर जा रहा था,
कोई भलामानुष था,
अजब वो नज़ारा था।
2 वर्ष पहले
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