लिखो, ज़िंदा हो तो लिखो,
जो तुममें गुरूर, रगों में लहू है, तो लिखो।
बेपरवाह, बेइंतहा दिल की गहराइयों से लिखो,
तुम्हारी हसरतों में चिंगारियाँ हैं, तो लिखो।
लिखो, जग गए हो तो लिखो,
जानते हुए भी कि शब्द कम हैं तुझमें, लिखो।
खुद को शब्दों में ढूँढने के लिए, लिखो,
जो छूट गया, कहीं खो गया, तो लिखो।
लिखो, बोलते बोलते थक गए, तो लिखो,
आसमां खुसफुसाता है, ज़मीं थपथपाती है, लिखो।
भीतर से कोई पुकारता है, उसके लिए लिखो,
अपनी जिंदादिली, अपनी सच्चाई को लिखो।
लिखो, मजबूर हो तो भी लिखो,
बेचैनी, मुफ़्लिसी, आवारगी, तन्हाई में, लिखो।
अपने ज़मीर, अपनी सल्तनत की आबरू के लिए लिखो,
उस आहट..... दस्तक........गूँज........
जो रात भर जगाए रखती है, उसके लिए लिखो!