चल खुद का ख्याल बेहिसाब रखते हैं
खुद ही खुद के लिए दो अल्फ़ाज़ लिखते हैं
खुदा के अंश है परिस्थितियों का मुकाबला करते हैं
खुद को हिम्मत हौसले का सौगात देते हैं
खुद को कभी मायूस न करते हैं
खुद का हाथ खुद ही थाम लेते हैं
दूसरों के आगे फरियाद न करते हैं
अपने दिल को उत्साह से भर देते हैं
लोग नजर रखे हमारी कमियों पर
हम कमियों के साथ भी खुद को स्वीकार लेते हैं
लोग गिरा दे अपनी नजरों से
हम खुद को अपनी नजर में ही उठा लेते हैं
अगर पीछे पांव खींचे जमाना
हम अपने पैरों को एक रफ्तार देते हैं
हार के लिए दुआ करनें वाले करते रहे
हम खुद को सफलता का हार देते हैं
खुद को संवार देते है, दो शब्द अल्फ़ाज़ लिखते है