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पिता हूँ ना

Mamta Ingle

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहता है सुना है चांद
        
                                                    
                            
तो बैठा लेता हूं कांधे पर
और, माटी से घर बनाने का
सपना, करता हूं पूरा
स्वयं अपने हाथ सनाकर
चलना चाहता है तो
थाम लेता हूं अंगुली
लड़खड़ाते पैरों को
जमा लेता हूं अपने पैरों पर
तिपहिया साइकिल के लिए
बेच दी है अपनी पुरानी साइकिल
अच्छा लगता है, उसका
ताली बजाना, हाथी बाबा देखकर
इसलिए ले जाता हूं चिड़ियाघर
और, सुरीली ढोल की थाप सुनाने
मंदिर में आरती के समय
प्रसाद के लिए नन्हें हाथ पसारता
लगता है, सब कुछ मांग लेगा
ईश्वर से अपने और मेरे लिए
पूरी करना चाहता हूं
उसके मन के कोने में
बसी हर एक इच्छा
पिता हूँ ना
करता रहता हूं हर प्रयत्न
सहेजने का बेटे की आस।

- ममता इंगले
2 वर्ष पहले
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