एक दिन बैठे बैठे खयाल दिल में मेरे आया,की कोरोना ने इस दुनिया का क्या हाल बनाया। मैने इस कविता में कोरोना के कारण दुनिया का क्या हाल हुआ है इसका विवरण दिया है।।
कोरोना काल
हाल इस दुनिया का क्या से क्या हो गया,
लगता है जैसे वक़्त सो-सा गया।
स्कूल कॉलेज को देखे अरसा हो गया,
हाल इस दुनिया का क्या-से-क्या हो गया।।
सोचा ना था कभी ऐसा वक़्त भी आएगा,
एक दूसरे से मिलना भी दुश्वार हो जाएगा।
मुँह ढकना भी सबको ज़रूरी हो गया,
हाल इस दुनिया का क्या से क्या हो गया।।
तीज त्यौहार सब ऐसे ही निकल गए,
मंदिर मस्ज़िद सब बैंड हो गए।
साल ये बस ऐसे ही गुज़र गया,
हाल इस दुनिया का क्या से क्या हो गया।।
कब लौटेंगे फहिर वो दिन,कब होगा एक नया सवेरा?
देखने को खुशहाल दुनिया दिल बेताब से हो गया।।
हाल इस दुनिया का क्या से क्या हो गया।