विज्ञापन

जातिवाद

Mamta Bishnoi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुआं तो एक है
        
                                                    
                            
पानी भरा अनेक
मटके में भेद क्यों?
मिट्टी सबकी एक
उसमें पानी भी तो एक है।
अरे !इंसान का रंग रूप एक है
लहू सब में एक, वाणी सबकी एक
फिर जाती में भेद क्यो?
आग सबकी एक है
रोटी में भेद क्यों?
मौत तेरी भी आएगी
मेरी भी एक दिन
कफ़न वहीं ,शमशान भी वही
फिर जीते जी क्यों मरते हो।
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12470 कविताएं

View Profile

Ramesh Raj

25 कविताएं

View Profile