गुरु देवों भव:
जिन्दगी की सफलता का सबसे बड़ा
परोपकार तो गुरू का है।
जिन्दगी की कामयाबी
हाथों की लकीरों से नहीं गुरू के
मेहनत से मिलती है।
हमेशा ध्यान रखें कि
जो गुरू का कद्र नहीँ करता मान सम्मान नही करता वह जीवन की असफलता
की राह पकड़ता जाता है।
जिन्दगी की हर छोटी बडी सफलताओं के पीछे गुरू का साथ रहता है जिसे अपनी जीवन की मंजिल का पता नही होता उसे पहली सीढ़ी से अंतिम लक्ष्य तक पहुंचाने का काम करते है।
कम से कम साल में एक बार
अपने गुरूजी को याद करो
यहीं उनकी गुरूदक्षिणा होगा।