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"स्वतंत्रता की साँस"

Lakshman Jha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            स्वतंत्रता अपने भारत की, सुनाऊँ आज मैं तुमको,
        
                                                    
                            
नहीं, यह बात थोड़ी है सुनाऊँ दो सदी तुमको !
प्लासी युद्ध से उनका, बढ़ा व्यापार भारत में,
सदी ज्यों ही पूरी हुई, लिया सम्पूर्ण हाथों में।
विदेशी बन गए शासक, गुलामी सिर पर आई,
लड़ी पहली लड़ाई हमने, सफलता उनके सिर आई।
पचासी में बना कांग्रेस, स्वतंत्रता हमें लेनी थी,
लड़ेंगे हम अंग्रेजों से, कुर्बानी हमें देनी थी।
जब आए गाँधी भारत में, हुआ चहुँओर आंदोलन,
कभी असहयोग होता था, कभी दांडी का उद्घोषण।
भगत सिंह की कुर्बानी से, लगा अंग्रेजों को झटका,
समर में आ गए आज़ाद, दिया सुभाष ने झटका।
क्या जज़्बा था हम सब में, नहीं कोई शस्त्र काम आया,
लड़े हम एकता लेकर, तभी परिणाम मिल पाया।
हुए आज़ाद हम जिस दिन, नमन हम उनको करते हैं,
जिनके बदौलत आज हम, स्वतंत्र से साँस लेते हैं।
यही है एकता अपनी, सभी का मान करता हूँ,
रहे भारत सदा विजयी, सभी को जय-हिन्द कहता हूँ!
 
2 महीने पहले
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