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लड़की हो बिन जान प्राण की

Kumari Priyanka

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लड़की हो बिन जान प्राण की ,
        
                                                    
                            
क्यों प्राण डालने को आकुल हो।
पड़ी रहो धरती पर ऐसे,
क्यों पंख लगाने को व्याकुल हो?
सोई तो अच्छी लगती हो,
क्यों जग जाने को तत्पर हो?
क्यों दुनिया के जहरीले रंगों को,
गले लगाने को अग्रसर हो?
क्या पहना है,क्या करती है,
इन बात से जांची जाओगी।
गलती किसी की हो ।
फिर भी,
तुम पोशाक से नापी जाओगी।
कब जाना है, कहां जाना है ,
ये तय न तुम कर पाओगी।
लड़की हो तुम बिन जान प्राण के,
सिर्फ जिस्म से नापी जाओगी।
 
एक घंटा पहले
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