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ये लब तेरे

Kulbhushan Choudhary

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लब हैं पंखुड़ियां गुलाब की धीरे से खोल कभी,
        
                                                    
                            
रख मुंह में मिश्री की डली मीठे बोल बोल कभी

दुनिया कि परवाह नहीं जीना है तो खुल के जी
बिंदास हो कर डांस करो जो सुनो बजता ढोल कभी,

आवाज तेरी के दीवाने आते हैं रोज महफिल में
आ कर हमारी बज़्म में कर दो इसको अनमोल कभी,

आने से तेरे आए बहार महक उठे गुलशन सारा
हंसते हैं सारे गुल यहां जहां बोली थी दो बोल कभी,

दुनिया है रूप की दीवानी हम घायल हैं तेरे लिए,
रंग रूप में क्या रखा है कोयल सी बोली बोल कभी,

दिल में धड़कन है बाकी खिड़की के द्वार खोल कभी,
भूषण के कान तरस गए सुना दे सुरीले बोल कभी.
 
एक वर्ष पहले
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Updesh Kumar

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