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बचपन जिंदाबाद

Kulbhushan Choudhary

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उम्र का क्या है हर लम्हा तो ये बढ़ती रहती है,
        
                                                    
                            
बचपन की मासूमियत पल पल घटती रहती है,

आंखों में चमक दिल में उमंग जगाए रखना,
थोड़ी सी शरारत और बचपन बचाए रखना,

कभी साबुन के बुलबुले उड़ा कर तो देखो,
चेहरा दमक उठेगा किसी मासूम की तरह,

देखो कभी बुलबुले उड़ाकर हवा में तैरते हुए,
मासूमियत नजर आएगी किसी मासूम की तरह

जहां देखो बरसाती पानी छपाक से कूद जाओ,
निश्चल मुस्कान उभर आएगी बचपन की तरह,

कभी कागज की नाव बना चला कर तो देखो,
दोनों हाथों से बजाओगे ताली बचपन की तरह
 
एक वर्ष पहले
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