कच्ची उमर में दिल का मर जाना कैसा होता हैं
जीते जी कब्र में ख़ुद क़ो दफनाने जैसा होता हैं
तुम कहते हों बेरंगी रहती हूँ शौक नहीं मुझकों
कहीं सुना हैं लाश पे श्रृंगार दुल्हन जैसा होता है
मुझकों आज़ादी हैं अपनाने की शर्त ज़ात ठहरी
ज़ात में मुहब्बत हों हर दफ़ा कहाँ ऐसा होता हैं
महबूब भी मिले और ज़िम्मेदारियां भी पूरी हों
किसी ग़रीब के पास कहाँ इतना पैसा होता हैं
हालात बदल जाते हैं तों पसंद बदल जाती हैं
कोई भी शख्श कहाँ फिर पहले जैसा होता हैं
कृष्णा ने मान लिया करम वगैरह कुछ नहीं हैं
आजकल सुना क्या जैसे के साथ तैसा होता हैं
-कृष्णा शर्मा