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परिंदे का साहस

kavita kalawa

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उठा है परिंदा तो, उड़ान भी भरेगा
        
                                                    
                            
आसमान पाने कि चाहत को पूरा भी करेगा
आएगी मुश्किलें हजारों रास्ते में
परिंदा उन्हें दर - किनारे भी करेगा
उठा है परिंदा, तो उड़ान भी भरेगा।
मत पूछ उसे कि मंज़िल उसकी कहा है
हौंसले बुलंद हैं उसके मंज़िल वहां है
टूटेंगे सपने पर संघर्ष कड़ा करेगा
उठा है परिंदा, तो उड़ान भी भरेगा।।
2 वर्ष पहले
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