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जो काल के भी काल हैं

Kavi Deepak

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो काल के भी काल हैं
        
                                                    
                            
शिव शंकर महाकाल हैं।

जटायें विचरती गंग है
शोभित भाल मयंक है
लटकती नरमुंड माल हैं
शिव शंकर महाकाल हैं।

रुद्राक्ष अश्क़ है रुद्र का
श्रंगार भस्म है रुद्र का
आसन व्याघ्र खाल हैं
शिव शंकर महाकाल हैं।

सवारी करते नन्दी की
आसक्ति माँ आंनदी की
डमरू की प्रिय ताल हैं
शिवशंकर महाकाल हैं।

कैलाश पर निवास है
भक्त ह्रदय में वास है
होते तुरंत निहाल हैं
शिवशंकर महाकाल हैं।

'दीपक' भजे शिव तुम्हें
पुकारे भक्त शिव तुम्हें
त्रिलोकी हैं त्रिकाल हैं
शिवशंकर महाकाल हैं।
-डॉ. दीपक शर्मा 
2 वर्ष पहले
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