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गुल्लक

Kaustubh Vijay Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुमसे दूर किसी अन्य शहर में रहकर
        
                                                    
                            
बिताए अनगिनत लम्हों का
एक गुल्लक है मेरे पास...

गुल्लक में है,
वो सारी बाते जो मैं तुमसे कर न सका,
तुम्हारी यादों के किस्से और कुछ अधूरी कहानियाँ,
तुमसे मिलने के वादे, तुम्हारे संग बूढ़े होने के इरादे...
कुछ शिकायतें, कुछ आंसू, कुछ मुस्कुराहटें
और सपनों में आने वाली तुम्हारी आहटें,
कुछ हमारे झगड़े, कुछ कविताएं,
कुछ बारिशें, कुछ सर्दियां और
ढेर सारा इंतज़ार...

अब तुम बस मुझसे मिलकर
इतना कसकर आलिंगन देना कि,
हम दोनों के बीच रखा वो गुल्लक ही टूट जाए
और उसमें मौजूद सारी जमापूंजी
तुम्हारे हवाले हो जाए...

अब बताओ,
तुम्हारे संग जिंदगी बांटने का इससे सुंदर तरीका है कोई.......?
एक वर्ष पहले
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