तुम ऐसे तो न थे, यूँ जिंदगी से हार कर,
हम सबके सपनो को छोड़ बीच मझधार पर !
जाने फिर खता क्यों किया तूने ऐसा,
कि दामन छोड़ गया... सहसा !
कभी धोनी, कभी सरफराज तो कभी अन्नी बन हमें दीवाना बनाया,
उड़ेंगे साथ हम सब आसमां में, ये सपना दिखलाया,
“आत्महत्या समस्या का हल नहीं “ ये तुमने भी बताया ,
फिर क्यों आज हमें तूने इस कदर रूलाया !!
हालांकि !
अभी पारी अधूरी थी, फिर क्यों तेरे सर मौत का ताज था,
जाने क्या बात थी, या दफ्न कोई गहरा राज था,
मुस्कुराहट भी तेरा था,दर्द भी तेरा था, फैसला भी तेरा था,
शायद उस जख्म का फंदा ही इलाज था !!!
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