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भोलेनाथ: द लॉर्ड शिव

Karan Bansiboreliya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भक्तों ने उसे बड़े प्रेम से बुलाया था
        
                                                    
                            
आया था आया था वो दौड़े दौड़े आया था

निगला विष मंथन से जिसे कोई न पी पाया था
जब पी कर हला हल उसने दिखलाया था

कर खंडन विष की बूंद का सांप में बंटवाया था
सहन न कर पाया पीड़ा तब खप्परवाली को बुलाया था
क्या हुआ मेरे भोले को कोई ना समझ पाया था
कोई भांग, कोई औषधि,कोई बेल पत्र ले आया था
पुरे विश्व में वो नील कंठेश्वर कहलाया था
आया था आया था वो दौड़े दौड़े आया था

गंगा का वेग किसी से ना संभल पाया था
जब जटाओं में उसने गंगा को समाया था

चंद्र देव को भी श्राप से बचाया था
अर्ध चंद्र अपने कैश में लगाया था
भक्तों ने उसे बड़े प्रेम से बुलाया था
आया था आया था वो दौड़े दौड़े आया था

कामदेव ने जब काम वासना को जगाया था
उसने अपने त्रिनेत्र से कामदेव को जलाया था

पशुओं के साथ अपना प्रेम दिखाया था
तब जाकर कहीं वो पशुपति नाथ कहलाया था
भक्तों ने उसे बड़े प्रेम से बुलाया था
आया था आया था वो दौड़े दौड़े आया था

दक्ष प्रजापति भी उसे कहां समझ पाया था
उससे मिलने को शिव वैरागी रूप में आया था

हल्दी चन्दन न उपटन लगाया था
तन पर शिव ने बस भस्म रमाया था

कितनी अनोखी बारात जिसमें भूतों को बुलाया था
गले को जब अपने मुंड माला से सजाया था
हीरे मोती की माला एक तरफ रह गई
मेरे भोले ने तन पर रुद्राक्ष धारण किया था

मैंने अपनी प्रिय वस्तु के रूप में वासुकी को दिया
पार्वती की सकी बोली भोले आपने ये क्या किया

कुबेर ने जब भोले को भोजन पर बुलाया था
शिव उनका परिवार संपूर्ण विश्व बतलाया था
इस लिए वो विश्वनाथ कहलाया था
रावण ने काट कर एक एक शीश चढ़ाया था
भक्तों ने उसे बड़े प्रेम से बुलाया था
आया था आया था वो दौड़े दौड़े आया था

उन्हें पसंद है बस वीराना
चाहिए नहीं उन्हें कोई खजाना

कहते है लोग जिन्हें आदि योगी
संपदा नहीं कोई शमशान है जिनका घराना

ना कोई नियम है ना कोई कानून
बस एक लोटे जल का है दीवाना

लगता है वो जाना पहचाना
रिश्ता है कोई हमारा पुराना

बारे में शिव के सप्तऋषि ने बतलाया था
आया था आया था वो दौड़े दौड़े आया था

देव पूजे दानव पूजे
किन्नर पूजे मानव पूजे
पशु पूजे पक्षी पूजे
सर्प, सूक्ष्मजीव,नरभक्षी पूजे
पूजे सारा संसार
भोला है वो इतना भोला
कोई ना करे विचार

बैठा है श्मशान में वो
मरने के बाद अपनाएगा
फल में मिला धतूरा उसको
उसे भी गले लगाएगा
अमृत पीने वाले सुन लो
कोई हलाहल पिपाएगा
यही है मेरे भोले की उदारता
उसकी बराबरी भला कौन कर पाएगा
कंकर कंकर में शंकर है
जहां तक जायेगा उसे ही पायेगा

ना वेद लिखे ना लेख लिखे है
वैसा लिखा लोगों ने जैसे उन्हें शिव दिखे हैं

बनकर एक ख्याल मेरे जहन में आया था
आया था आया था वो दौड़े दौड़े आया था

Karan Bansiboreliya
2 वर्ष पहले
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