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कोरोना के डर से अब अपने पास आ रहे हैं

KAMNA TRIPATHI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            छोटी-छोटी खुशियां अब
        
                                                    
                            
सब साथ बिता रहे हैं।
इस कोरोना के डर से
अब अपने पास आ रहें हैं।
गैरों की तरह मिलते थे जो अपने
अब वह सब साथ नजर आ रहे हैं।
कोरोना के डर से ही सही
अब अपने पास आ रहें हैं।


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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