टीका
जग की बुरी नजर न लगे
मां लगा देती है रोज प्यार से
मुन्ने की ललाट पे कोने की तरफ
एक छोटा सा काजल का टीका
बच्चे बीमार न हो कभी
और रहे स्वस्थ खुशहाल
पोलिया टीटनस से बचे रहे
सरकार लगवाती है टीका
घर से बाहर निकले
ललाट की बढाता शोभा
लाल सिंदूरी, पीला चंदन का
आशा विश्वास जगाता टीका
दाम्पत्य जीवन का दस्तूर
नये रिश्ते की मधूर शुरुआत
अपनो मे अपनापन बढाता
शगुन शुभ मंगलदायक टीका
ओर रणवीर निकलते थे जब
दुश्मनो को धूल चटाने को तब
बढ क्षत्राणी, वीर के मस्तक पर
करती थी स्वाभिमान का टीका
महामारी आई कभी तो
विज्ञान करता नई नई ईजाद
लडते शरीर मे जाकर के वह
वायरस को चुनौती देता टीका
टीका चिह्न, निशानी कह दो
चाहे कितने नये अर्थ ही कर दो
मानव जीवन का हिस्सा अभिन्न
करता रहता जीवन रक्षा टीका
कमलेश जोशी
कांकरोली राजसमंद