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छुट्टी तो बस नाम की मिली

Junaid Ahmad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिन पांच रहा सरकार का,
        
                                                    
                            
रहा एक दिन घर परिवार का,
फिर आया मेरा दिन इतवार का....

धोना है कपड़ा सोमवार से शुक्रवार का,
करवाना है दाढ़ी-बाल सेट, बनने के लिए कर्मचारी सरकार का....

सोचा था आज आराम करेंगे,
पर काम खड़ा था इंतज़ार का,
कभी कपड़े, कभी घर के काम,
यही हाल रहा इतवार का....

लो बीत गया दिन इतवार का,
अब फिर वही किस्सा हर सोमवार का,
चल दिए बोझ उठाने फिर से
अपने-अपने रोज़गार का....

छुट्टी तो बस नाम की मिली,
बाकी हिसाब रहा काम-कार का,
कल से फिर पांच दिन की ड्यूटी है
और इंतज़ार रहेगा अगले इतवार का
~जुनैद अहमद
एक महीने पहले
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