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उतरते नकाब...

Jitendera Kr

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उतरते नकाब...
        
                                                    
                            
उतरे हैं नकाब उनके पहले भी तो हैरत इस बार भी नहीं,
तुम मेरे कितने हो यह तो छुपी बात नहीं।
खफा तो तुम सूरज की रोशनी से भी हो,
जो मुझे ऊंचाई पर देख सको ऐसी तुम्हारी तासीर नहीं।
जानता हु तुम्हे ऐ मेरे दोस्त खुद से ज्यादा,
तुम गैरो में भी ना गिराओ मुझे ऐसी तो तुम्हारी नियत नहीं...
 
10 घंटे पहले
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