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बैठे पंछी

Jaykishan Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बैठे पंछी
        
                                                    
                            
उड जा अब तो
देर ॲधेर हो जायेगा
जो ऑधी तूफान आयेगा
तू फिर से ढेर हो जायेगा
मौसम रिमझिम होयेगा तो
बिन बताये सवेर हो जायेगा
बैठे पंछी
उड जा अब तो
देर ॲधेर हो जायेगा
ऑधी तूफान आयेगा तो
तू फिर से ढेर हो जायेगा
देखता है राह तू
कब से यूँ ही
सोचता है यार को
तब से यूँ ही
रोयेगा फिर तू
मौसम के बवंडर में
खोयेगा फिर तू
अतीत के समंदर में
छोड दे बाट तू
किसी अंजाने की
निकल पड ढ़ूँढ़ने
पेट प्यास अपने की
समय ना थमता
क्यूँ तुझे थमना
प्रलय ना रूकता
क्यूँ तुझे रूकना।
बैठे पंछी
उड जा अब तो
देर ॲधेर हो जायेगा
जो ऑधी तूफान आयेगा
तू फिर से ढेर हो जायेगा
15 घंटे पहले
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