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हर उम्र की खूबसूरती

Jagdish Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर उम्र की खूबसूरती
        
                                                    
                            

एक उम्र तक आईना, सूरत को तोलता है,
बताता है कितने सुंदर, कितने अनमोल हैं।

फिर एक उम्र आती है, आईना चुप होता है,
मन ही बताता है, हम कितने सुकून में हैं।

तब न नाक का दुख है, न होंठों का हिसाब,
न कद का झगड़ा है, न रंग का जवाब।

सबसे सुंदर वही है, उस पड़ाव पर,
जो धूप अपनी हँसकर, स्वीकार लेता है।

जो अपने दागों से, बैर नहीं करता,
बिना प्रमाण के भी, खुलकर मुस्कुराता है।

खूबसूरती चेहरे की, रेखा नहीं होती,
वो तो जीने के ढंग में, बसी हुई होती।

हर उम्र का अपना, एक नूर होता है,
हर पड़ाव का अपना, सुरूर होता है।

 
एक घंटा पहले
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