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नारी: एक अनुपम कृति

Jagadish Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धरा धारित्री की अनुपम कृति नारी जिसका नाम।
        
                                                    
                            
जगत पिता की शिल्पकला का है अद्भुत परिणाम।।
नारी जीवन का आधार
बरसाये ये स्नेह अपार
बीना के मधुरिम सप्तक से
कर दे मन के झंकृत तार
सीमातीत स्मिता जिसकी है असीम आयाम
धरा धारित्री ...
आँचल में है स्नेहाशीष
वाणी वेद ऋचा आशीष
शुभ शुभ्रा हो जीवन जिससे
नारी दाता की आशीष।
भानु भानवी सी चमकीली सुख दुख आठो याम।
धरा धारित्री...
नारी हरगुन ज्ञान प्रवीना
ममतामयी स्नेह लवलीना
गतिशीला जीवनगति जिससे
समझाये जो जीवन जीना
सीमारेखा बांध सके ना जो अतुलित बलधाम

- धरा धारित्री ...
एक वर्ष पहले
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