विज्ञापन

कुसुम डहेलिया का सुंदर सजीला अति, रंग लिए लाल रूप अति ही निराला है।

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुसुम डहेलिया का सुंदर सजीला अति, रंग लिए लाल रूप अति ही निराला है।
        
                                                    
                            
शरद के आने से ही पहले ये खिलता है, बरखा के अंत तक होता जाने वाला है।
दलों का समूह मिल कर छवि धाम बने, मानो इसे खुद ही कोमलता ने पाला है।
जो भी इसे देखता है मन इसी का है होता, जैसे इन्द्रजाल में हुआ ये मतवाला है।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
1 hour ago
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12479 कविताएं

View Profile

Ramesh Raj

25 कविताएं

View Profile