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कुसुम डहेलिया का सुंदर सजीला अति, रंग लिए लाल रूप अति ही निराला है।

Indra Prasad

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                            कुसुम डहेलिया का सुंदर सजीला अति, रंग लिए लाल रूप अति ही निराला है।
        
                                                    
                            
शरद के आने से ही पहले ये खिलता है, बरखा के अंत तक होता जाने वाला है।
दलों का समूह मिल कर छवि धाम बने, मानो इसे खुद ही कोमलता ने पाला है।
जो भी इसे देखता है मन इसी का है होता, जैसे इन्द्रजाल में हुआ ये मतवाला है।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
एक महीने पहले
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